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उत्तर कोरिया की अमेरिका को धकमी, ‘बिजली सप्लाई कर देंगे ठप’

अमेरिका, उत्तर कोरिया पर हमला करना चाहता है. रूस, उत्तर कोरिया पर अमेरिकी हमले के खिलाफ है. चीन भी कह चुका है हमला करना विकल्प नहीं है. अमेरिका के साथ जापान और दक्षिण कोरिया हैं जबकि उत्तर कोरिया के साथ रूस और चीन खड़ें हैं.

सोल: उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग उन लगातार दुनिया को परमाणु युद्ध की तरफ धकेलने में लगा है. अब उत्तर कोरिया ने अमेरिका की बिजली ठप करने की धमकी दी है. उत्तर कोरिया सैटेलाइट के जरिए अमेरिका के पावर ग्रिड पर हमला कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो पूरे अमेरिका में अंधेरा छा जाएगा. इससे पहले उत्तर कोरिया ने अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी भी दी है.

उत्तर कोरिया के राजदूत ने परमाणु परीक्षणों को बताया आत्मरक्षा का उपाय

जिनेवा के एक कार्यक्रम में उत्तर कोरिया के राजदूत ने अपने देश के परमाणु परीक्षणों को आत्मरक्षा का उपाय बताते हुए कहा, ‘’मेरे देश ने हाल ही में आत्म रक्षा के लिए जो कदम उठाए हैं, वो अमेरिका के लिए गिफ्ट पैकेज हैं. अमेरिका को मेरे देश से ऐसे गिफ्ट पैकेज तब तक मिलते रहेंगे, जब तक वो हमें उकसाने और हम पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिशें करता रहेगा.’’

हाइड्रोजन बम के बाद अब एक और मिसाइल परीक्षण की तैयारी में उत्तर कोरिया

दुनिया पहली बार परमाणु और हाइड्रोजन बमों के युद्ध के मुहाने पर खड़ी है. इतने खतरनाक युद्ध का खतरा इसलिए मंडराया है, क्योंकि उत्तर कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग उऩ हाइड्रोजन बम के बाद अब एक और मिसाइल परीक्षण की तैयारी में है. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि किम जोंग उन को सबक सिखाने का वक्त आ गया है.

क्या उत्तर कोरिया दुनिया को विश्व युद्ध के करीब खींच लाया है ?

इस वक्त दक्षिण कोरिया हाई अलर्ट पर है. उत्तर कोरिया से जंग की तैयारी वो शुरू कर चुका है. जमीन, आसमान और समंदर, हर तरफ से उत्तर कोरिया को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयारी चल रही है. मिसाइलें फायर की जा रही हैं. बम बरसाए जा रहे हैं. युद्धक जहाज जंग की जैसी प्रैक्टिस कर रहे हैं.

उत्तरी कोरिया की तरफ से समुद्र के रास्ते होने वाली कार्रवाई की स्थिति में नौसेना की स्थिति की जांच करने और उकसाने पर दुश्मन को सबक सिखाने के लिए ये ड्रिल की गयी है.

दक्षिण कोरिया के साथ है अमेरिका

दरअसल दक्षिण कोरिया के उत्तर कोरिया की धमकियों को नज़रअंदाज़ नहीं करने की दो बड़ी वजहें हैं, पहली उत्तर कोरिया का तानाशाह शासक किम जोंग उन दक्षिण कोरिया से बेहद नफरत करता है. दूसरा, उत्तर कोरिया के पास परमाणु हथियार हैं जबकि दक्षिण कोरिया के पास नहीं हैं. लेकिन दक्षिण कोरिया के लिए सबसे बड़ी राहत की बात अमेरिका का उसके साथ रहना है. दक्षिण कोरिया पर हमला सीधे अमेरिका पर हमला माना जाएगा, इसीलिए उत्तर कोरिया से जंग की सूरत में अमेरिका अपनी पूरी ताकत दक्षिण कोरिया को बचाने में झोंक देगा.

उत्तर कोरिया की दर्जनों मिसाइलें फौरन लॉन्च होने की स्थिति में

दरअसल खतरा इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि खबर मिली है कि उत्तर कोरिया लंबी दूरी तक मार करने वाली अपनी मिसाइलों को पश्चिमी समुद्री तटों की तरफ ले जा रहा है. वो मिसाइलों को रात में शिफ्ट करवा रहा है, जिससे उसकी हरकतों पर नजर ना रखी जा सके. मिसाइलों को फायर करने की सारी सुविधाएं उत्तर कोरिया के पश्चिमी तट पर मौजूद हैं. खबर है कि उत्तर कोरिया की दर्जनों मिसाइलें फौरन लॉन्च होने की स्थिति में तैयार खड़ी हैं.

अब सवाल ये है कि विश्व युद्ध वाली स्थिति बन कैसे रही है. दरअसल उत्तर कोरिया की इस हिमाकत के पीछे फिर से वही दुनिया के दो सुपर पावर्स का आमने सामने आना है.

रूस, उत्तर कोरिया पर अमेरिकी हमले के खिलाफ

अमेरिका, उत्तर कोरिया पर हमला करना चाहता है. रूस, उत्तर कोरिया पर अमेरिकी हमले के खिलाफ है. चीन भी कह चुका है हमला करना विकल्प नहीं है. अमेरिका के साथ जापान और दक्षिण कोरिया हैंजबकि उत्तर कोरिया के साथ रूस और चीन खड़ें हैं.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसे हालातों में किसी भी प्रतिबंधों का सहारा लेना बेकार और अक्षम है. ये सब पूरी दुनिया को तबाही की ओर ले जा सकते हैं और ये पीड़ितों की एक बड़ी संख्या की वजह बन सकता है.

अमेरिकी चेतावनियों को मानने से इंकार करता रहा है उत्तर कोरिया

दरअसल उत्तर कोरिया लगातार अमेरिकी चेतावनियों को मानने से इंकार करता आ रहा है, इसीलिए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ज्यादा खार खाए बैठे हैं. व्लादिमीर पुतिन की बातों को नज़रअंदाज़ करते हुए ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया है.

ट्रंप ने ट्वीट किया है कि बड़ा हफ्ता आने वाला है. कांग्रेस, अपने काम को करने के लिए तैयार हो जाओ. मैं जापान और दक्षिण कोरिया को अनुमति दे रहा हूं कि वो अमेरिका से अत्याधुनिक हथियार और सैन्य उपकरण को अधिक से अधिक मात्रा में खरीद सकते हैं.

ट्रंप का इशारा साफ है कि वो उत्तर कोरिया को इतनी आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं, लेकिन उत्तर कोरिया को कमज़ोर समझने की भूल करना भारी पड़ सकता है. दोनों देशों की ताकत में भले ही जमीन आसमान का अंतर हो लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि सनकी किम जोंग परमाणु हथियारों को दागने से पहले ये नहीं सोचेगा कि इससे दुनिया को कितना नुकसान होगा.

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